
कभी सोचा है कि आपके घर के किचन में रखा गैस सिलेंडर भी अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़ा हो सकता है? दिल्ली, मुंबई या पटना में बैठा एक आम परिवार जब सिलेंडर बुक करता है, तो उसे शायद अंदाज़ा नहीं होता कि उस गैस की कहानी हजारों किलोमीटर दूर समुद्र के रास्तों से होकर गुजरती है.
और अभी वही रास्ते तनाव में हैं. मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष ने दुनिया की ऊर्जा सप्लाई चेन को हिला दिया है. नतीजा यह हुआ कि भारत में LPG की कीमतें बढ़ गईं और डिलीवरी में देरी होने लगी.
सवाल अब सिर्फ गैस के दाम का नहीं, बल्कि किचन इकॉनमी के संतुलन का बन गया है.
जेब पर असर: सिलेंडर कितने महंगे हुए
हाल ही में घरेलू और कमर्शियल दोनों गैस सिलेंडरों की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर में करीब 60 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. वहीं 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर में 144 रुपये का इजाफा हुआ है.
अभी प्रमुख शहरों में गैस के रेट इस तरह हैं
- दिल्ली: करीब 913 रुपये
- मुंबई: लगभग 912.50 रुपये
- कोलकाता: करीब 939 रुपये
- चेन्नई: लगभग 928.50 रुपये
कुछ शहरों में यह कीमत 1000 रुपये के पार भी पहुंच चुकी है.

किल्लत की असली वजह
ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक भारत अपनी जरूरत की लगभग 60 प्रतिशत गैस आयात करता है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण Strait of Hormuz जैसे अहम समुद्री रास्तों पर दबाव बढ़ गया है. इसी रास्ते से खाड़ी देशों से गैस और तेल की बड़ी खेप दुनिया भर में भेजी जाती है. जहाजों को अब वैकल्पिक रास्तों से जाना पड़ रहा है, जिससे डिलीवरी में देरी और लागत दोनों बढ़ रही हैं.
बाजार में ब्लैक का खेल
गैस की कमी का फायदा कुछ लोग उठाने से भी नहीं चूक रहे. कई शहरों में बिना बुकिंग के गैस सिलेंडर 1200 से 1500 रुपये तक में बिकते देखे गए हैं. यानी आधिकारिक कीमत से कहीं ज्यादा.
कागजों में सप्लाई सामान्य दिखती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कतारें लंबी होती जा रही हैं.

सरकार का ‘कंट्रोल मोड’
स्थिति बिगड़ने से पहले सरकार ने भी कई कदम उठाए हैं. जमाखोरी रोकने के लिए Essential Commodities Act लागू कर दिया गया है. अब एक सिलेंडर लेने के बाद दूसरा सिलेंडर 25 दिन बाद ही बुक किया जा सकेगा.
सरकार ने यह भी तय किया है कि सबसे पहले गैस की सप्लाई घरेलू रसोई, फिर अस्पताल और स्कूलों को दी जाएगी.
होटल और रेस्टोरेंट की मुश्किलें
जहां घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है, वहीं होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री की चिंता बढ़ गई है. कई व्यापारिक संगठनों का कहना है कि अगर कमर्शियल गैस की सप्लाई सीमित रही तो बाहर खाना भी महंगा हो सकता है. इस मुद्दे पर पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri ने एक कमेटी बनाने का फैसला किया है जो व्यापारियों की शिकायतें सुनेगी.
क्या घबराने की जरूरत है?
सरकार का दावा है कि स्थिति अस्थायी है. भारत अब अपनी ऊर्जा सप्लाई के लिए वैकल्पिक रास्तों और नए आयात स्रोतों पर काम कर रहा है.
अच्छी खबर यह है कि देश की रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और नई गैस खेप जल्द ही भारत पहुंचने वाली है.
रसोई की अर्थव्यवस्था का सबक
ग्लोबल राजनीति और घरेलू बजट के बीच रिश्ता अब पहले से कहीं ज्यादा साफ दिखाई दे रहा है. समंदर में चल रही जंग का असर सीधे गैस चूल्हे की लौ पर दिख रहा है. और यही इस दौर की सबसे बड़ी सच्चाई है.
दुनिया चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, उसका असर आखिरकार आपकी रसोई तक पहुंच ही जाता है.
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